चंपावत
चंपावत के चर्चित कथित फर्जी गैंगरेप केस से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव आनंद सिंह मेहरा को फिलहाल जमानत नहीं मिल पाई है। आनंद सिंह मेहरा की गिरफ्तारी 15 मई को हुई थी। उन पर इस मामले में कथित तौर पर साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए गए हैं।
अब खबर ये है कि मेहरा के परिजनों ने हाईकोर्ट में दाखिल जमानत याचिका वापस ले ली है और अब निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन करने का फैसला किया गया है।यानी अब मेहरा के समर्थकों की नजर निचली अदालत की सुनवाई पर टिकी है और उन्हें उम्मीद है कि वहां से जल्द राहत मिल सकती है। लेकिन इस पूरे मामले का एक दूसरा राजनीतिक पहलू भी है। मेहरा के कुछ समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से पार्टी नेतृत्व की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। समर्थकों का आरोप है कि आनंद सिंह मेहरा को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत का करीबी माना जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व की ओर से उनके मामले में अपेक्षित सहयोग नहीं दिखाई दे रहा।इन समर्थकों का ये भी दावा है कि मेहरा को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने से लेकर पार्टी स्तर पर मनोबल बढ़ाने तक, कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही। अब सवाल यही है कि आखिर कांग्रेस नेतृत्व इस मामले पर खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहा? क्या पार्टी नेतृत्व कानूनी प्रक्रिया का हवाला देकर पूरे मामले से दूरी बनाए हुए है? या फिर पार्टी के भीतर इस मामले को लेकर कोई अलग रणनीति चल रही है?
यहां ये साफ करना जरूरी है कि मेहरा पर लगे आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और आरोप साबित होना अभी बाकी है। इसलिए पूरे मामले में अंतिम फैसला अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। लेकिन राजनीतिक तौर पर समर्थकों की नाराजगी जरूर चर्चा का विषय बन रही है।क्योंकि जिन कार्यकर्ताओं ने लंबे समय तक पार्टी के लिए काम किया, अगर उनमें से किसी नेता पर गंभीर आरोप लगते हैं और वह जेल में है, तो स्वाभाविक तौर पर उसके समर्थक चाहते हैं कि पार्टी कम से कम कानूनी और मानवीय स्तर पर उसके साथ खड़ी दिखाई दे। फिलहाल मेहरा के समर्थकों की उम्मीद अब निचली अदालत से मिलने वाली राहत पर टिकी है। देखना होगा कि निचली अदालत में जमानत याचिका कब दाखिल होती है और अदालत इस पर क्या फैसला सुनाती है।
साथ ही ये भी देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर अपनी स्थिति सार्वजनिक तौर पर स्पष्ट करता है या नहीं। क्या आनंद सिंह मेहरा को जल्द मिलेगी बेल?क्या कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में कोई कदम उठाएगा?
और क्या समर्थकों की नाराजगी आने वाले दिनों में पार्टी के लिए नया सवाल खड़ा करेगी?

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